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  • By: Sayed Amir
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  • 23.09.2020

Padosi ke Huqooq

आज के इस टॉपिक Padosi ke Huqooq के बारे में हदीस शरीफ़ की रोशनी में जानेंगे कि पड़ोसियो के इस्लाम में क्या मक़ाम है क्या हुकूक है।अल्लाह के रसूल sallallahu alayhi wasallam ने क्या फरमाया है पड़ोसियों के बारे में। तो चलिए जानते हैं।

इंसान को अगर ज़िन्दगी कि तमाम नेमतें मिल जाए,दौलत हो, इज्जत हो, नेक फरमा बरदार औलाद हो, खुश अखलाक और पाक दामन बीवी हो,खूब अच्छा बड़ा मकान हो,बिज़नेस भी हो लेकिन अगर इन सभी नेमतें होने के बाद अगर उसका पड़ोसी सही नहीं हो तो ये एक मुसीबत उसकी पुर सुकून जिंदगी जीने को दूभर करने के लिए काफी है।इस का तजुर्बा आप सब को भी है।

इसी तरह अगर किसी के पास ज़िन्दगी गुजरने के लिए दुनिया की कुछ नेमतें काम भी है और उसका पड़ोसी खुश अखलाक हो नेक हो उसके दुख सुख में शामिल हो सुबह शाम उससे मिलता हो उसकी खबर लेता हो तो उसकी ज़िंदगी में सुकून होने में कोई शक नहीं है।

यही वजह है कि अल्लाह के सबसे महबूब नबी हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लाल्लहू अलैहि वल्लम ने ना सिर्फ खुद बुरे पड़ोसी से पनाह मांगी है बल्कि ummat को भी इस की तालीम दी है ।

इस्लाम में पड़ोसी के इतने हुकूक है कि अगर कोई गैर मुस्लिम सिर्फ इसी पर गौर करें तो उसको इस्लाम क़ुबूल करने में ज़रा भी देर ना लगेगी।और वो सिर्फ इस्लाम की इसी एक खूबी की वजह से ही इस्लाम में दाखिल हो जाएगा।

Padosi Ke Baare Me Allah ke Rasool ka Irshaad

हदीस में आता है कि मोमिन की शान यह है कि उसका पड़ोसी अगर गरीब है तो वह अपना सालन ज्यादा बनाएं चाहे उसके लिए पानी मिलाकर उसे पतला करना क्यों ना पड़ जाए ताकि पड़ोसी के गरीब बच्चे भी उस नेमत से मेहरूम ना रहें और उनको उसकी खुशबू सूंघ कर अपनी गरीबी का एहसास ना होने पाए

अल्लाह !अल्लाह! क्या तालीम दी है इस्लाम ने क्या इसका तसव्वुर किसी और गैर इस्लामी मजहब में किया जा सकता है अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आकर हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने पड़ोसियों के हुकूक के सिलसिले में बार-बार इतनी सख्त ताकीद फरमाई की हुजूर सल्लल्लाहो वाले वसल्लम को यह कहना पड़ा कि मुझे अंदेशा हुआ कि कहीं पड़ोसी को मरने वाले के माल में वारिस ही ना बना दे ।

आप सल्लल्लाहो वसल्लम ने फरमाया कि

“वह शख्स मोमिन नहीं हो सकता जिसका पड़ोसी उसके शरारतों से महफूज ना हो”

रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार मुसलमानों को मुखातिब करके फरमाया “तुम जन्नत में दाखिल नहीं हो सकते जब तक मोमिन नहीं बनते और तुम मोमिन नहीं बन सकते उस वक्त तक जब तक एक दूसरे से मोहब्बत नहीं करते और अपने पड़ोसियों का हक अदा नहीं करते”

सहाबा रजि अल्लाह ताला अनु ने पूछा कि पड़ोसी का हक किया है आप सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने फरमाया अगर वह तुमसे कुछ मांगे तो उसे दो, अगर वह तुमसे मदद चाहे तो उसकी मदद करो, अगर वह जरूरत के लिए कर्ज मांगे तो उसको कर्ज़ दो, अगर वह तुम्हारी दावत करे तो उसे कबूल करो, अगर वह बीमार हो जाए तो उसकी बीमार पूर्सी करो, अगर उसका इंतकाल हो जाए तो उसके जनाजे के साथ जाओ, और अगर तकलीफ में हो तो उसकी तसल्ली दो, वह अपने हांडी में उसका हक रखो, किसी अच्छी चीज की महक से उसे तकलीफ ना दो, अपनी इमारत को इस तरह ऊंचा ना करो कि उसके घर की धूप हो और रोशनी रुक जाए अगर वह इज़ाजत दे दे तो दूसरी बात है।

एक शख्स ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में आया और एक सवाल पूछा या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो वाले वसल्लम एक औरत बहुत नमाज में पढ़ती है रोजा रखती है सदका करती है मगर उसकी जात और उसकी जबान से उसके पड़ोसी तकलीफ में आप सल्ला वाले वसल्लम ने फरमाया वह दोज़ख में हैं फिर उसी शख्स ने कहा कि एक औरत नफिल नमाज रोजे नमाजे और सदका वगैरह तो कम करती है मगर उसके पड़ोसियों से बहुत खुश हैं रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो वसल्लम ने फरमाया वह जन्नत में है।

Conclusion

पड़ोसी चाहे मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम दोनों आपके लिए इस लिहाज से बराबर है कि आप उसकी जात से उस को तकलीफ ना पहुंचे रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने इस इंसान को सबसे ज्यादा अच्छा बताया जो अखलाक में सबसे अच्छा हो कयामत के दिन जो सबसे ज्यादा वजनी चीज होगी वह हसने सुलूक होगा इसीलिए जरूरी है कि पड़ोसी के साथ इज्जत और इस तरह का सुलूक किया जाए उसे हर तरह का आराम पहुंचाया जाए, छोटी-छोटी बातों का गिला शिकवा कर के ताल्लुकात में कड़वाहट ना पैदा किया जाए

याद रखिए जो हमारे घर के करीब रहता है वह हमारे Husne-sulook का ज्यादा हकदार हैं और जरूरत के वक्त खुद हम भी उसकी मदद की तालिब हो सकते हैं।

आज से हम अहद करते हैं कि आपने तमाम पड़ोसियों का हमेशा ख्याल रखेंगे क्योंकि हसने सुलूक ही से दिल जीते जाते हैं और कयामत के दिन हुस्ने सुलूक ही सबसे ज्यादा वजनी अमल ठहरेगा।

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Jazakallah hu khair

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