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  • By: Sayed Amir
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  • 03.11.2020

Salam Karne Ka Sunnat Tarika

अस्सलमु अलैकुम दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम Salam Karne Ka Sunnat Tarika और सलाम करने के सही तरीके के बारे में जानेंगे किस तरीके से सलाम किया जाता है, और सलाम की अल्फ़ाज़ क्या है, सलाम में क्या चीज मना है, और किस तरह से मुसाफा किया जाता है, सलाम का सुन्नत तरीक़ा और तमाम बातों के बारे में इस पोस्ट में जानेंगे।

Salam Kya Hai। सलाम क्या है

मजहब इस्लाम ने Salam Karne Ka Sunnat Tarika बताया है और दुनिया के तमाम और धर्म में तमाम दूसरे मजहब से बेहतर और अफजल तरीका बताया है सलाम में दुआ देने वाले अल्फ़ाज़ इस्तेमाल किए जाते हैं यानी जो आदमी किसी दूसरे आदमी को मैंने मुसलमान को सलाम करता है तो उसको दुआ देता है और दुआ देने वाले जो वर्ड ऐसे हैं जो सबसे अच्छे हैं यानी सलामती और अल्लाह की रहमत, जब तक यह दोनों किसी आदमी को हासिल ना हो कोई भी दुनिया का काम अच्छे से नहीं हो सकता, हदीस शरीफ में हाथ से और उंगली के इशारे से सलाम करने को मना किया गया है

एक हदीस में आया है कि जब तक तुम एक दूसरे के दोस्त ना बन जाओ पूरे ईमानदार ना बन सकोगे और मैं तुम्हें एक दूसरे से दोस्ती पैदा करने का तरीका बता देता हूं और वह तरीका यह है कि आपस में सलाम करो या एक दूसरे को सलाम करने को रिवाज दो एक दूसरों को सलाम करो।

Salam Ke Alfaaz

किसी से मुलाकात के वक्त कोई बात करने से पहले सलाम करना सुन्नत है सलाम के साथ शुरुआत करना सुन्नत है जब कोई आदमी किसी आदमी से मुलाकात कर तो पहले सलाम से शुरू करें उसके बाद अपनी आगे की बात को continue करे और सलाम का जवाब देने को भी बहुत अहम बताया गया अगर सलाम के साथ अलिफ लाम भी कहे तो बेहतर है यानी अस्सलामु अलैकुम वा रहमतुल्लाही व बराकातूहू कहे और इस तरह भी सलाम किया जा सकता है सलामु अलैकुम वा रहमतुल्लाही व बराकातूहू इस तरह से।

एक रिवायत में आता है कि हुसैन के बेटे इमरान से रिवायत है कि जंगल का रहने वाला कोई आदमी हुजूर अकरम सल्लल्लाहो सल्लम के पास आया और अस्सलामु अलैकुम कहां आप सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने उसके सलाम का जवाब दिया जब वह बैठ गया तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया तुझे 10 नेकियों का सवाब मिल गया उसके बाद एक और आदमी आया उसने कहा अस्सलामु अलैकुम वा रहमतुल्लाही व बराकातूहू आप सल्लल्लाहो सल्लम ने सलाम का जवाब दिया जब वह बैठ गया तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया तुम्हें 30 नेकियों का सवाब मिला।

Salam Karne Ka Sunnat Tarika। सलाम करने का सुन्नत तरीक़ा

सलाम करने का सुन्नत तरीका यह है कि जो आदमी सामने से आ रहा हूं वह बैठे हुए लोगों को सलाम करें और जो सवार हो यानी जो गाड़ी से हो, कार से हो बाइक से हो, घोड़े से हो, वह पैदल या बैठे हुए लोगों को सलाम करेंगा, बहुत से लोगों की भीड़ में से एक ही का सलाम कहना काफी है इसी तरह ग्रुप या भीड़ में बहुत से लोगों में से एक ही आदमी का जवाब देना भी काफी है।

काफिर आदमी को पहले सलाम करना जायज नहीं अगर कोई मुशरिक यानी जो शिर्क करता हो किसी मुसलमान को सलाम कहे तो मुसलमान उसके जवाब में सिर्फ अलाईक कहे उससे ज्यादा कुछ ना कहें और मुसलमान के सलाम के जवाब में वालेकुम अस्सलाम कहे जिस तरह इसने अस्सलामु अलैकुम कहा। जवाब देने में अगर बरकातहू का लफ्ज़ बढ़ा दे तो ज्यादा अच्छा है।

कुरान मजीद ने इरशाद है “और जब तुम्हें किसी तरह सलाम किया जाए तो तुम इससे बेहतर सलाम करो इसी तरह का जवाब दो”(surah Nisa)

अगर कोई मुसलमान दूसरे मुसलमान को सिर्फ “सलाम” करें जिस तरह आमतौर पर गांव में लोग “सलाम साहब” “सलाम भैया” कहते हैं इस तरह से तो उसे जवाब नहीं देना चाहिए बल्कि उसे बता दिया जाए कि खाली सलाम करने सुन्नत नहीं है बल्कि पूरा सलाम करना चाहिए जो सुन्नत तरीका है।

औरतों का एक दूसरों को सलाम करना बेहतर है मगर किसी मर्द का जो इन औरतों को सलाम कहें मकरूह है। अगर औरत का चेहरा खुला हुआ हो इसी पोजीशन में सलाम किया जा सकता है।

सलाम करना लड़कों के हक में बेहतर है इसलिए कि इन्हें सलाम करने पर अमादा करना सलाम की आदत डालने के जैसा है

जो आदमी मजलिस से उठकर बाहर जाए वह जाते वक्त पूरे मजलिस वालों को सलाम कहकर जाए या कुछ देर के बाद अगर वापस आए तब भी अस्सलामु अलैकुम कहे अगर मजलिस दरवाजे या दीवार के पीछे हो तब भी सलाम कहना चाहिए अगर सामने हो तो दोबारा भी सलाम कहना अच्छा है।

Kab Salam Karna Mana Hai

कुछ ऐसे खास जगह है जहां पर Salam Karna Mana Hai जैसे अगर कोई लोग शतरंज खेल रहे हो,लूडो खेलते हुए जुए में लगे हो, शराब पी रहे हो, या इस तरीके से किसी गुनाह का काम कर रहे हो तो उन लोगों को सलाम करना मना है अगर वह लोग करें तो जवाब दे दिया जाए लेकिन अगर दिल में यह ख्याल आया कि अगर मैं जवाब नहीं दूंगा तो यह लोग अपने आमाल पर शर्मिंदा होंगे और इस गुनाह से बाज आ जाएंगे रुक जाएंगे तो फिर सलाम का जवाब ना दें।

कोई मुसलमान अपने दूसरे मुसलमान भाई से 3 दिन से ज्यादा तक बातचीत और बोलचाल बंद ना करें लेकिन जो अहले बिदत, गुमराह, और गुनहगार हो उनसे हमेशा अलग रहे एक मुसलमान दूसरे मुसलमान को सलाम कहता है तो वह जुदाई या नाराजगी के गुनाह से छुटकारा पा लेता है।

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Musafah kaise karen। मुसाफा कैसे करे।

सलाम के बाद दूसरी चीज आती है मुसाफा यानी हाथ मिलाना मुसाफा करना या हाथ मिलाना मुस्ताहब है अगर सलाम की शुरुआत इसी से की हो तो जब तक दूसरा आदमी मुसाफा के बाद अपना हाथ अलग ना करें तब तक अपना हाथ अलग नहीं करना चाहिए।

मुसाफा के बाद बरकत और दीनदारी के लिए किसी आदमी या बुज़ुर्ग के सर और हाथों को बोसा दे तो यह जायज है मगर एक दूसरे के मुंह का बोसा लेना मकरूह है।

Adab Aur Tazeem Ke Liye Khade Hona

दुनिया में बहुत से ऐसे बुजुर्ग है अवलिया e किराम है जिनके आदाब और ताजीम के लिए खड़ा होना मुस्ताहब है।

आदिल बादशाह हो उसकी इज़्ज़त और अदब के लिए खड़ा होना मुस्तहब है

वालदेन यानी मां बाप के लिए अदब में खड़ा होना दुरुस्त है

औलिया ए किराम ,उलमा ए किराम,दीन दार,नेक आदमी,बुज़ुर्ग,के लिए अदब लिए खड़ा होना मुस्तहब है।

इस मसले की बुनियाद इस रिवायत पर है कि आप सल्ला वाले वसल्लम ने हजरत साद को एक बार कहीं भेजा वह सफेद गधे पर सवार होकर आए उनकी आमद पर आप सल्ला वाले वसल्लम ने सारी मजलिस वालों से कहा कि अपने सरदार की तालीम के लिए खड़े हो जाओ।

इसी तरह जब आप सल्ला वसल्लम हजरत फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा के घर तश्रीफ ले जाते तो हजरत फातिमा रजी0 भी आपकी ताज़ीम के लिए खड़ी हो जाती है इसी तरह जब कभी हजरत फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा आप सल्लल्लाहो सल्लम के घर जाती तो अल्लाह के रसूल भी हजरत फातिमा की आमद पर खड़े हो जाते हैं उनके हाथ को चूम कर बगल में बिठाया करते

नबी अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम का इरशाद है किसी काम का बुजुर्ग आदमी तुम्हारे पास आए तो उसकी इज्ज़त करो ऐसी इज्ज़त दिलो में मोहब्बत और दोस्ती पैदा करती है लोगों के लिए खड़ा होना उन्हें एक तोहफा देने के बराबर है गुनहगार के लिए खड़ा होना मकरूह है।

*Note- शेख अब्दुल हक मुहद्दिसे से देहलवी रहमतुल्लाह अलैह मिशकात शरीफ की शरह असतुल उलमात में लिखते हैं कि ताज़ीम के लिए खड़ा होना इसमें कुछ उल्मा का मतभेद है अबू सईद खुदरी रजि अल्लाह ताला अनु की हदीस की दलील पर कुछ उल्मा खड़े होने होने को सुन्नत करार देते हैं और कुछ उल्मा इसे मकरूह और बिदत बताते हैं क्योंकि आप सल्ला वाले वसल्लम ने सहाबा इकराम को किसी के आने पर खड़ा होने पर मुखालफत की थी

इस बात में दोनों तरह की हदीस आई है और इन दोनों को मौका और महल के हिसाब से अमल करना दुरुस्त है।

Conclusion

तो दोस्तों यह था आज का टॉपिक में Salam Karne Ka Sunnat Tarika और मुसाफा करने का सुन्नत तरीका किस तरीके से सलाम किया जाता है और सलाम करने में क्या-क्या बना है इन सब चीजों के बारे में हमने जाना दोस्तों अगर आपको यह टॉपिक पसंद आया हो तो इसको अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें ताकि दीन की मुकम्मल मालूमात और सही मालूमात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आसानी के साथ पहुंच सके।

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