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  • By: Sayed Amir
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  • 26.12.2020

Happy New Year manana kaisa hai

नये साल के हवाले से कुछ बातें आपके सामने रखनी है। दिसंबर की 31 तारीख़ और हैप्पी न्यू ईयर के हवाले से। क्योंकि नौजवान हमारा इस हरकत में पड़ा हुआ है और एक दूसरे को नए साल की मुबारकबाद इसकी जारी है। इस बारे में इस्लाम क्या कहता है और हमारे इस्लामिक कल्चर में क्या Happy New Year manana kaisa hai क्या इसकी इजाज़त है इसके हवाले से मैं इंशाअल्लाह पूरी बात आपके सामने रखूंगा।

मजहब की तालीम तो बिल्कुल खुली हुई है आप सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम के दौर में जब नये साल की शुरुआत होती थी। तो नबी करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम क्या किया करते थे हमें इस बारे में हदीस से जो हिदायत मिलती है वो नए महीने की है नए महीने का चांद देख कर आप सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम दुआ मांगा करते हैं
अल्ला हुम्मा अहिल्लहु बिल युमनी वल ईमान वस सलामती वल इस्लाम वत तौफ़ीकि लिमा तुहिब्बू वतर्जा रब्बी वा रब्बु कल्लाह।

ये मशहूर दुआ अल्लाह के रसूल मांगा करते थे

 Tarjuma –ऐ! अल्लाह इस नए महीने को हमारे हक में बरकत वाला बना सलामती वाला बना।


अगर कोई नए साल पर चाहे वो इस्लामी हो या अंग्रेजी साल हो। इसमें अगर कोई दुआ मांगता है की ऐ! अल्लाह इस नये साल को हमारे लिए बरकत का जरिया बना और जो हमसे कोताही हुई है आइंदा उन कोताहियों को दूर करने की हमे तौफीक अता फरमा तो इसमें कोई हर्ज नहीं।

लेकिन जब नया साल आता है तो हमारा मुसलमान नौजवान Happy New Year celebration के लिए पिकनिक प्वाइंट ढूंढता फिरता है 31 December के दिन Happy New Year के नाम पे क्या क्या फितना पैदा होता है कोई New year मनाने गोवा के Beach पर जा रहा है कोई महंगे महंगे होटल और Resort में जा रहा है कोई कहां जा रहा है हमें क्या हो गया है क्या हमारा ईमान भी सलामत है,हम आज जगह जगह केक काट रहे है,रंगीन पार्टियां कर रहे है नाच गा रहे है, क्या हमे यही तालीम दी गई है आपको क्या हो गया

ऐ उम्मत के नौजवानों ये हमारी नस्ल आज किन राहों पर जा रही है क्या उन अंग्रेजो कि यही तहज़ीब और यही Culture आपको अपनाना था आपकी अक्ल को क्या हो गया,आप अपनी तहज़ीब को भुला कर अपने ईमान की ताकत को खोते नजर आ रहे है अपने उस मर्तबे को जो अल्लाह के रसूल सल्ल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी उम्मत को दिया लेकिन जब भी 31 December आता है हम भी एक दूसरे को Happy New year की बधाई देते नज़र आते हैं हम भी उनकी पार्टियों में शामिल हो रहे है डांस कर रहे है,शराब पी कर क्लबों में नाचते फिर रहे है

man tashabbaha
अल्लाह के रसूल ने फरमाया

من تشبه بقوم فهو منهم

“जिसने जिस कौम की मुशाबहत इख्तियार की वो उन्हीं में से है  “

ग़ैर मुस्लिमों की ईदो पर जशन और उसमे शिरक़त से मुतअल्लिक़ फ़रमान

⭕ – “والذين لا يشهدون الزور” (سورۃ الفرقان : ٧٢)۔

सलफ् की एक जमात ने इसका मतलब यह बयान किया है” और रहमान के बंदे वह है जो कुफ्फार की ईदो में शिरकत नहीं करते-“

[ تفسیر ابن کثیر – ١١٨/٦ ]


गैरमुस्लिमों की ईद पर उनकी इबादत गांहों का रुख मत किया करो बेशक अल्लाह इन पर अल्लाह का गुस्सा उतरता है”

[ سيدنا عمر بن الخطاب رضى الله عنه || مصنف عبد الرزاق : ١٦٠٩ ]

“गैर मुस्लिमों की जमीन में रहने वाला मुसलमान उनकी ईदों को उन्हीं की तरह मनाए और इस रवैय्ये पर उसकी मौत आ जाए
तो कयामत के दिन वह उन्हीं के साथ उठाया जाएगा”

[ سيدنا عبد الله بن عمرو رضى الله عنهما || السنن الكبیر للبيهقي : ١٨٨٦٣ ]

अगर किसी शख्स की बीवी साई हो तब भी वह उसको ईसाइयों की ईद में शिरकत की इजाजत ना दे क्योंकि अल्लाह ने गुनाहों के काम में सपोर्ट करने को माना किया है

[ امام احمد بن حنبل رحمه الله || المغني لابن قدامة : ٣٦٤/٩ ]

गैर मुस्लिम की ईद पर उन्हें मुबारकबाद पेश करना ऐसा है जैसे किसी सलीब के आगे सजदा करने पैर मुबारकबाद पेश करना

[ امام ابن القيم رحمه الله || أحكام أهل الذمة : ٢١١/٣ ]

“अगर कोई शख्स 50 साल अल्लाह की इबादत करें शेर मुशरिकीन की ईद के मौके पर उस दिन की ताजीम में करते हुए किसी मुस्लिम को एक अंडा ही तोहफा दे दिए तो उसने कुफ्रिया काम किया और अपने तमाम अमाल बर्बाद कर लिए-“


[ امام ابو حفص كبير الحنفي رحمه الله || الدر المختار : ٧٤٥/٦ ]

शाफई फुकहा का कहना है कि कुमार की ईद में शिरकत करने वाले को सजा दी जाये
*[ مغني المحتاج للشربيني :)

 Happy New year की मुबारकबाद और हमारी अक्ल

मुबारक बाद हमेशा किसी को किसी खुशी के मौके पर दी जाती है नया साल का आना कोई खुशी नहीं है क्योंकि हम जितनी जिंदगी दुनिया में लेकर आये हैं जब भी नया साल आता है तो ये इस बात की अलामत होती है कि हमारी जिंदगी में एक साल कम हो गया।

मैं इसकी एक मिसाल दे कर समझाने की कोशिश कर रहा हूं एक शख्स को कराची से बिठा कर लाहौर ले जाया जा रहा है। फांसी पर चढ़ाने के लिए। कराची से उसको आपने बिठाया उस मुजरिम को लाहौर की अदालत में उसके मुकदमे की सुनवाई में जाना है और वहां उसको फांसी के फंदे में चढ़ाया जाना है।

जैसे जैसे लाहौर का स्टेशन करीब आएगा तो उसे हर स्टेशन पर क्या मुबारकबाद मिलेगी कि माशा अल्लाह आप एक स्टेशन अब आगे आ चुके इसी तरह हर स्टेशन पर उसको मुबारकबाद मिलती है सोचिए दुनिया में उससे बड़ा बेवकूफ और कोई होगा जो इस मौके पर उसको मुबारकबाद दे।

हम इस दुनिया में गिनी चुनी उम्र लेकर आते हैं हमारा हर कदम रोज़ाना एक गड्ढे की तरफ जा रहा है कोई दुनिया में 60 साल की जिन्दगी लेकर आया को 50 साल की जिन्दगी लेकर आया कोई 40 साल की जिन्दगी नया साल गुजारना इस बात की अलामत है कि आप का हर क़दम आप अपनी कब्र के करीब जा रहे है एक साल आप और अपनी कब्र के करीब जा चुके हैं।

ये अजीब हिमाकत की बातें कि आप कब्रिस्तान के करीब होते जा रहे हैं और आप उसकी एक दूसरे को मुबारकबाद दे।

तो मौत के करीब जाना या मौत के मुंह में जाना ये कोई खुशी की बात है कि आप एक दूसरे को उसके मुबारकबाद पेश करें। हमलोग बहुत सारी चीजें अंग्रेजो से बगैर सोचे समझे लेते है जो ऊट पटांग चीजें उनके यहां चल रही होती हैं। वो सारी हम भरपूर तरीके से अडॉप्ट करते चले आ रहे है। इस मिसाल से आपको ये बात साफ हो गई होगी की Happy New Year manana kaisa hai  और इस की मुबारबाद देना कैसा है।

Conclusion

नया साल का आना इसमें हरगिज़ कोई खुशी का तसव्वुर नहीं। इसीलिए आज के इस टॉपिक इस्लाम में Happy New Year manana kaisa hai। में हमने ये जाना की नए साल पर ना तो मुबारकबाद दे और ना ही ऐसा कोई काम करे जिससे अल्लाह कि नाराजगी हो, अल्लाह ताला हम सबको कहने सुनने से ज़्यादा अमल कि तौफीक़ अता फरमाए और ऐसी तमाम खुराफात से बचाए।

आमीन

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