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  • By: Sayed Amir
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  • 23.11.2020

Surah Maun in hindi with translation

Surah Maun मक्के में नाजिल हुई मगर कुछ mufassir कहते हैं कि मदीने में नाजिल हुई क्योंकि इसमें मुनाफिकीन कि वह किस्में बताई गई है जो नमाज में गफलत बरतते हैं वह अगर नमाज पढ़ भी लेते हैं तो दिखावे की नमाज पढ़ते हैं वैसे मुनाफिक कसरत से मदीने में ही पाए जाते थे क्योंकि मक्के में तो अहले इमान छुप-छुप कर नमाज पढ़ते थे और वह एलानिया नमाज अदा करें तो उन पर जुल्मों सितम का पहाड़ खड़ा कर दिया जाता था इसलिए इस बात की दलील है और मुमकिन है कि Surah Maun in hindi with translation यह सूरत मदीने में नाजिल हुई इस सूरत में 7 आयत है और 1 रुकू है

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Surah maun in Arabic text

Surah Al- Maun in hindi text

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम

अराएतल लजी यु कज्जीबू बिद्दिन ,

फजालीकल लजी यदु उल-यतीम ,

वला या हुद्दु अला ता-अमिल मिसकीन ,

फा वाई लुल-लिल मु सल्लीन ,

अल लजीना हुम अन सलातीहीम सहून ,

अल लजीना हुम युरा-उन ,

वा यमना वनल मा-उन ,      

Surah maun hindi translation

शुरू करता हूं अल्लाह के नाम से जो मेहरबान और निहायत रहम वाला है

1– क्या आप ने उस शख्स से देखा, जो जजा और सज़ा के दिन को झुटलाता है

2- ये वही तो है जो यतीम को धक्के देता है

3- और मुहताज को खाना खिलाने पर नहीं उभारता

4- तो ऐसे नमाज़ पढने वालों के लिए बर्बादी है

5– जो अपनी नमाज़ से गाफिल रहते हैं

6- जो दिखावा करते हैं

7- और जो मामूली चीज़ें देने में भी रुकावट डालते हैं

Surah maun in english text

Bismilla hirrahmanirraheem

1- Ara ‘aytal lazee yukazzibu biddeen

2- Fazaalikal lazee yadu’ul-yateem

3- Wa la yahuddu ‘alaa ta’aamil miskeen

4- Fa wailul-lil musalleen

5- Allazeena hum ‘an salaatihim saahoon

6- Allazeena hum yuraaa’oon

7- Wa yamna’oonal maa’oon

Surah maun ki Tafseer

Qayamat ke munkir kafir

 सूरत में यह बताया गया कि आखिरत पर ईमान ना लाने वाले इंसान यानी काफिर में बहुत सी बुराइयां पैदा होती हैं जैसा कि इन दिनों मक्के का और सारे मक्के का हाल यह था कि कोई किसी को आखिरत की जजा और सजा का यकीन ही नहीं था और ना ही कयामत के दिन का आने का उनको यकीन था, बस यही दुनिया की जिंदगी और जिंदगी का आराम करना उन काफिरों को पता था,

Yateemon ka haq cheenna

यतीमो का हक तो बगैर किसी हिचक के मार ले जाते थे,और उनका सामान लूट लेते थे, और ढेर सारे ज़ुल्म करते थे, इनका कोई यारों मदद गार नहीं था और ना ही कोई उनसे पूछने वाला था इन लोगों के दिलों में किसी का किसी ऐसे दिन का आने का डर ही ना था,अगर यतीम अपने हक का मुतालबा करता था तो उसे धक्के मार कर निकाल दिया जाता था,

Khana na khilane ki targeeb dena

गरीबों को भी वह खुद खाना खिलाते थे और ना ही दूसरों को खाना खिलाने की नसीहत करते थे बस जितना हो सके अपना ही पेट भरते थे और अपने पैसे को जोड़ जोड़ कर रखते थे किसी को कुछ मदद नहीं करते थे अगर कोई चीज उनके पास हुआ करती और अगर जाने वाली या किसी दोस्त ने उनसे थोड़ी देर के लिए एक चीज को मांगा इस्तेमाल करते तो साफ इनकार कर देते थे और जकात निकालने से तो उनके माल में कमी आ जाने वाली बात होती थी।

Munafikon ki pahchaan aur namaz se gaflat

दूसरी तरफ मुनाफिकों की एक जमात का जिक्र अल्लाह ताला ने इस सूरत में किया है और नाम के मुसलमान है जो कि नमाज पढ़ते हैं तो दूसरों को दिखाने के लिए उनको अपना धंधा और मस्तियों से फुर्सत ही कहां मिलती है वरना अल्लाह की याद में और अल्लाह की दी हुई नेमतों के शुक्रगुजार होने में कुछ देर नमाज़ पढ़े, और नमाज पढ़ते वक्त यह भी नहीं सोचते कि वह किस अजीम हंसती के सामने खड़े हैं लेकिन उनका दिमाग दूसरी तरफ रहता है या फिर जल्दी-जल्दी नमाज पढ़ते हैं की टेलीविजन का प्रोग्राम हाथ से निकल जाएगा चाहे नमाज का वक्त गुजर जाए लेकिन नमाज के लिए इनका प्रोग्राम खत्म नहीं होता तो फिर ऐसो को किस तरह का मुसलमान कहा जाए इनको मुनाफिक ही कहना बेहतर है।

और दूसरा वह आदमी जो गरीब और मोहताज को खाना नहीं खिलाता है और ना ही अपने घर वालों को कहता है कि गरीबों और में मिस्कीनों को खाना दो और ना ही दूसरे लोगों को उस बात पर उभरता है कि जो गरीब और मिस्कीन है जो भूखे मर रहे हैं उनको उनका हक दे दे

Maaun kise kahte hai

माउन कहते हैं कि ऐसी छोटी छोटी चीजों को जो अक्सर लोगों के यहां नहीं होती पास पड़ोस से मांग कर काम चलाना पड़ता है जैसे डेग, नमक, माचिस, तेल, फावड़ा, कुदार, सुई धागा, डोल,रस्सी,बाल्टी वगैरह

एक बा-कमाल मोमिन की शान यह है कि मांगने वालों को यह चीजें खुशी से दे दे जो काम निकल आने के बाद वापस आ ही जाएंगे इंसानियत का एक छोटा सा काम है लेकिन जिसके अखलाक गिरे हुए होते हैं और आखिरत पर यकीन नहीं होता है यतीम की इज्जत नहीं करता है और नमाज में गफलत करता है ऐसे लोगों को तो इतनी तौफीक भी नहीं कि कुछ देर के लिए किसी का काम कर दें।

Conclusion

मुसलमानों के लिए नसीहत

अल्लाह तआला की ये हिदायात जो इन आयातों में मौजूद हैं सिर्फ मुनाफिकीन और काफिरों के लिए नहीं बल्कि मुसलमानों के लिए भी हैं और जो कमियां ऊपर बताई गयीं वो मुसलमानों में सिरे से होनी ही नहीं चाहिए |

लेकिन बदकिस्मती से वो चीज़ें आज मुसलमानों में कसरत से पाई जा रही हैं |  हालाँकि ये तमाम काम ऐसे लोगों के हैं जो आखिरत को नहीं मानते और दुनिया ही को उन्होंने सब कुछ समझ रखा है किसी सही मुसलमान से ऐसे कामों की उम्मीद नहीं की जा सकती |

आज के इस टॉपिक Surah Maun in hindi with translation में इसका और तर्जुमा, तफसीर और उसका हिंदी और इंग्लिश टेस्ट के बारे में जाना और पढ़ें अगर आप ये सूरत पढ़ कर अच्छा लगा हो तो आप अपने दोस्तों के साथ भी ज़रूर शेयर करें ।

Jazakallah hu khair

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